आठ घरों में नौकरानी का काम करने वाली 17 साल की शालिनी ने कर्नाटक में पीयू एग्जाम में 84.8 प्रतिशत नंबर हासिल कर सबको चौंका दिया है। बचपन से ही आर्थिक तंगी से लेकर कई समस्याओं में घिरी शालिनी ने साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई करते हुए यह स्कोर हासिल किया है। बता दें कि कर्नाटक में 12वीं कक्षा की परीक्षा को पीयूसी-प्री यूनिवर्सिटी सर्टिफिकेट के नाम से जाना जाता है। बोर्ड की 12वीं की परीक्षा का आयोजन कर्नाटक बोर्ड ऑफ प्री-यूनिवर्सिटी एजुकेशन करता है।

शालिनी को कइ बार बदलना पड़ा मीडियम

 

 शालिनी क्लास एक से लेकर सातवीं तक तमिल माध्यम से पढ़ी, इसके बाद दसवीं तक उसने कन्नड़ माध्यम से पढ़ाई की। दसवीं के बाद पीयू स्टडीज के लिए उसने एसजीपीटीए-दिक्षा कॉलेज में इंग्लिश मीडियम में दाखिला लिया। लगातार मीडियम बदलने से जितनी ज्यादा तकलीफ शालिनी को नहीं हुई उससे कहीं ज्यादा उसके सामने पारिवारिक समस्या थी।

एक अंग्रेजी अखबार से बीतचीत करते हुए शालिनी ने कहा, ”एक दशक पहले एक बिल्डिंग से गिरने के कारण मेरे पिता बिस्तर पर ही पड़े रहते हैं। अब मुश्किलसे वह उठ पा रहे हैं। पिता के साथ हादसे के बाद मां ने घरों में काम करना शुरू कर दिया। जब मेरी मां नहीं होती थी तो मुझे घर चलाना पड़ता था।” तब तक फिर भी उसके घर में सबकुछ ठीक चल रहा था लेकिन उसके सेकेंड पीयू एग्जाम के पहले परिवार पर एक और कहर टूटा। उसके छोटे भाई में ब्लड कैंसर का पता चला और वह अंतिम अवस्था में पहुंच चुका था। इस अवस्था में शालिनी अपने भाई के साथ अक्सर अस्पताल में होती लेकिन वहां भी वह किताब लेकर पढ़ा करती थी।

 

उसने बताया, ”यदि मुझे अस्पताल में इतना वक्त नहीं देना पड़ता तो हो सकता था कि मैं और अच्छा नंबर लाती। लेकिन मेरे लिए मेरे नंबरों से ज्यादा कहीं महत्वपूर्ण है मेरा भाई। अब माँ भाई की देखभाल में लगी रहती है इस कारण मुझे घरों में काम करने जाना पड़ता है। मैं अब सीईटी की तैयारी कर रही हूं इसलिए घरों में काम करने के लिए मुझे शेड्यूल मिलाना पड़ता है।”

 

 

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और देर रात तक काम करते हुए करती है पढ़ाई

 

 

घरों में काम करने के बीच पढ़ाई के लिए समय कैसे मिलता है? इसके जवाब में शालिनी ने कहा, ”मैं सुबह साढ़े चार बजे उठ जाती हूं। अपने घर का काम खत्म करने के बाद मैं पांच घरों में काम करने जाती हूं जहां मैं पानी भरने और रंगोली बनाने का काम करती हूं। 6 बजे तक मैं ये सारे काम खत्म कर देती हूं। इसके बाद मैं एक ऑफिस में जाकर वहां फर्श और बाथरूम साफ करती हूं। साढ़े सात बजे तक ये काम करने के बाद मैं कपड़े साफ करने के लिए दूसरे घर में चली जाती हूं। इन सब कामों के बाद बड़ी मुश्किल से मैं नौ बजे तक घर आ पाती हूं और फिर सीईटी की तैयारी में जुट जाती हूं। साढ़े 12 बजे तक मैं घर के काम के साथ पढ़ाई करती हूं और फिर दो और कामों के लिए जाती हूं। इसके बाद साढ़े चार बजे शाम को वापस आती हूं और 6 बजे तक पढ़ाई करती हूं। इसके बाद जब फिर काम के लिए जाती हूं तो नौ बजे वापस आती हूं और फिर रात तक पढ़ती हूं।’

 

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अपनी मेहनत और शानदार नंबरों के लिए शालिनी ने अपने कॉलेज के शिक्षकों को श्रेय दिया है। वहीं, एसजीपीटीए पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल प्रताप नायडू ने कहा, ”शालिनी बहुत ही मेहनती लड़की है। वह सबसे घुल मिलकर रहती है और उसमें सिखने की काफी लगन है। परिवार की विपरीत परिस्थितियों के बाद भी हमेशा उसके चेहरे पर मुस्कान रहती है।”

ये पोस्ट खास कर उन विद्यार्थियों के लिए है जो पढाई नहीं करते या जिनका पढाई में मन नहीं लगता है। मैं उन विधार्थियो से ये पूछना चाहता हूँ की क्या आपके साथ भी ऐसी कोई दुविधा है, अगर नहीं तो क्यों आप पढाई लिखाईसे कतराते है। आप सभी को इस पोस्ट में बताई गई शालिनी  से प्रेरणा लेनी चाहिए जिन्होंने बहुत ही प्रतिकूल परिस्थिति में भी अपना साहस नहीं खोया और अपनी पढाई में लगे रहे। और इस बात में कोई शक नहीं होगा की वो एक  दिन काफी अच्छे पद पर आसीन होंगी।

 

परिस्थिति केसी भी हो हार ना मानने  वाला ही जीतता है।

– Dharmesh Pithva

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